गुफा की साधना | short story in hindi 2020

गुफा की साधना | short story in hindi  2020 : यह छोटी सी कहानी हमें बड़ा सन्देश दे रही है। आपको इस कहानी को पढ़ने में दो या तीन मिनट्स लगेंगे लेकिन आपको इस कहानी से जो सन्देश मिलेगा वो मार्मिक होगा। एक समय की बात है एक गांव के पास लगती पहाड़ी पर एक महात्मा जी तपस्या करने के लिए चले गए। महात्मा जी ने दुनिया का त्याग कर दिया था। वह अपने सगे-संबंधियों, परिवार वालों को छोड़कर जंगल में तपस्या करने के लिए निकल पड़े। उन्होंने अपने साथ तन को ढकने के लिए मात्र एक कपड़ा ही लिया था, बाकी सब कुछ वो घर पर छोड़ आये थे। 
गुफा की साधना | short story in hindi  2020
www.gyankipotli.com
पहाड़ी पर उन्हें एक सुनसान छोटी सी गुफा मिल गई। वह वहाँ बैठकर सारा दिन तपस्या करने लगे। जब उन्हें भूख लगती थी तो वह दिन में एक बार कंदमूल खाकर गुजारा कर लेते थे और पहाड़ पर बहते झरने में नहा लिया करते थे। धीरे-धीरे दिन बीतते गए और उनकी तपस्या चलती रही।

कुछ दिन बीतने के बाद महात्मा जी को एक परेशानी आने लगी। उनके पास कमर पर लपेटने के लिए मात्र एक कपड़ा ही था। जब वह नहाते थे तो कपड़ा गीला हो जाता था और गीले कपड़े को सुखाते समय उन्हें झाड़ियों में छिप कर बैठना पड़ता था। एक दिन उन्होंने सोचा कि क्यों ना मैं गांव में जाकर एक और कपड़ा ले आऊं, वह गांव में गए और उन्होंने अपनी परेशानी गांव वालों को बताई, गांव वालों ने महात्मा जी को एक कपड़ा दे दिया। कपड़ा लेकर महात्मा जी फिर पहाड़ पर तपस्या करने के लिए चले गए। अब सब कुछ ठीक लग रहा था क्योंकि अब नहाते समय वो दूसरा कपड़ा पहन लेते थे और गीले कपड़े को सुखाने के लिए झाड़ियों पर डाल देते थे। दिन बीते गए, सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था लेकिन एक दिन महात्मा जी ने देखा कि एक चूहा उनके कपड़े को कुतरने की कोशिश कर रहा था।

चूहे के कारण महात्मा जी का तपस्या में ध्यान बटने लगा, अब जब वो आंख बंद करके तपस्या में बैठते तो उनका ध्यान इस बात पर रहता कि कहीं चूहा उनके कपड़े को कुतर ना दे। महात्मा जी दया के कारण चूहे को मारना नहीं चाहते थे। एक दिन उन्होंने सोचा कि क्यों ना चूहे को डराने के लिए मैं एक बिल्ली को ले आऊं। अगले दिन वह फिर गांव में गए और एक बिल्ली ले आये। बिल्ली के डर से चूहा कपड़ों के पास नहीं आता था। महात्मा जी खुश थे क्योंकि अब तपस्या में उनका ध्यान बट नहीं रहा था। लेकिन दो-तीन दिन बाद बिल्ली की सेहत में गिरावट आने लगी क्योंकि बिल्ली कंदमूल खाकर गुजारा नहीं कर सकती थी।

यह एक नई परेशानी महात्मा जी के सामने आ गई थी। महात्मा जी फिर गांव में गए, उन्होंने अपनी परेशानी गांव वालों को बताई, गांव वाले महात्मा जी का बहुत सम्मान करते थे, उन्होंने महात्मा जी को कहा कि आप हर रोज बिल्ली के लिए गांव से दूध ले लेना। हमें आपकी सेवा करके प्रसन्नता होगी। बिल्ली के दूध का इंतजाम हो चुका था। दूध मिलने के कारण बिल्ली का भी वहाँ मन लग गया था। बिल्ली के डर से चूहे अब महात्मा जी को परेशान नहीं करते थे। महात्मा जी अब आराम से ध्यान करने लगे थे। ऐसे कुछ हफ्ते और बीत गए लेकिन महात्मा जी एक दिन सोचने लगे कि मुझे दूध के लिए हर रोज पहाड़ी से नीचे उतर कर गांव में जाना पड़ता है और इसमें मेरा काफी समय बीत जाता है, तपस्या नहीं हो पाती। यह एक अलग तरह की परेशानी अब महात्मा जी को दुखी करने लगी, उनकी तपस्या का कीमती वक्त आने-जाने के कारण बर्बाद हो रहा था। एक दिन महात्मा जी के मन में आया कि क्यों ना मैं गांव से एक गाय ले आऊं, गाय के आने से एक तो दूध मिल जाएगा, बिल्ली को दूध पिला दिया करूंगा और गाय पहाड़ी पर अपने आप घास अदि चर लिया करेगी, मेरा गांव में आने-जाने का समय भी बर्बाद नहीं होगा।

महात्मा जी की परेशानी को सुन कर गांव वालों ने उनको एक गाय दे दी। महात्मा जी गाय को लेकर पहाड़ पर आ गए। चार-पांच दिन तो बहुत बढ़िया चला लेकिन अब महात्मा जी सोचने लगे कि गाय को दूना, उसे चराने के लिए लेकर जाना, फिर बिल्ली को दूध पिलाना, काफी समय इन कामों में बर्बाद हो रहा है। महात्मा जी परेशान हो, उन्हें लगा मेरा कीमती समय तपस्या में न लगकर इन कामों में लग रहा है। कभी-कभी गाय दूध निकालते समय महात्मा जी को लात भी मार देती थी। एक दिन महात्मा जी को इस समस्या का हल सूझा, वह  गांव से एक बीमार, गरीब और बेसहारा भिखारी अपने साथ पहाड़ पर ले आए, उन्होंने उस भिखारी को कहा कि यहां मेरे साथ पहाड़ पर आराम से रहो, गाय का दूध निकालो, बिल्ली को पिलाओ और खुद भी पीओ। अपनी सेहत बनाओ, तुम्हें यहां कोई समस्या नहीं आएगी, मैं हूं न।

गुफा की साधना | short story in hindi  2020
gyankipotli.com
बीमार भिखारी को सहारा मिल गया। वह महात्मा जी के साथ रहने लगा, अब महात्मा जी तपस्या में ज्यादा समय बिताते लगे। महात्मा जी को अब चूहे तंग नहीं करते थे, बिल्ली को रोज गाय का दूध मिल जाता था और गाय दुने वाला खुली हवा में घूमता था, फल खाता था ,दूध पीता था और आराम से सो जाता है। कुछ महीनों बाद गरीब और बीमार युवक की अच्छी-खासी सेहत बन गई। वह हट्टा-कट्टा जवान बन गया। महात्मा जी तो तपस्या में डूबे रहते थे लेकिन वो युवक अपने-आपको अकेला महसूस करता था, वह बोर हो जाता था, ऊब जाता था। कभी-कभी उसके मन में यह विचार आता था कि मैं महात्मा जी को छोड़कर वापस गांव में चला जाऊं लेकिन फिर वह सोचता था कि महात्मा जी ने उसके ऊपर कितना बड़ा परोपकार किया है, उसे मुफ्त में दूध मिलता है, फल मिल रहे हैं, इतना अच्छा वातावरण है, कुछ ज्यादा करना भी नहीं पड़ता। महात्मा जी को छोड़कर जाने का विचार उसने त्याग दिया। एक दिन उसने महात्मा जी को कहा कि महात्मा जी आपने तो संसार का त्याग कर दिया है, आप तो एक फकीर बन गए हैं, दुनियादारी छोड़ चुके हैं, पर मैं तो एक मामूली इंसान हूं, आपकी सेवा करना मेरा परम कर्तव्य है लेकिन मैं अपने आपको यहां बहुत अकेला महसूस करता हूं आप मुझे अगर आज्ञा दें तो मैं अपने लिए गांव से एक दुल्हन ले आता हूं।

गुफा की साधना | short story in hindi  2020
www.gyankipotli.com
महात्मा जी ने सोचा कि बात तो यह सही कह रहा है, एक जवान आदमी को शादी तो जरूर करनी चाहिए और मैं तो ठहरा एक फकीर, इसका तो पूरा जीवन बाकी पड़ा है, हां, इसे शादी कर लेनी चाहिए। महात्मा जी ने युवक को शादी की आज्ञा दे दी। युवक के लिए महात्मा जी गांव से एक दुल्हन पहाड़ पर ले आए। अब सब कुछ ठीक हो गया। दुल्हन के आने से अब युवक का मन लग गया,  दुल्हन सारा दिन वहां पर काम करती, गाय की देखरेख करती, झाड़ू-पोछा लगाती। महात्मा जी की गुफा के आसपास सफाई रहने लगी। महात्मा जी निश्चिंत थे, उन्हें ऐसा लगने लगा कि अब मेरी तपस्या में कोई रुकावट नहीं आएगी।
समय कहाँ रुकता है, समय बीतता गया,  युवक के यहाँ बेटा ने जन्म लिया, उनका गांव में आना जाना बढ़ गया। कभी-कभी उनके काम के लिए महात्मा जी को भी उनके साथ गांव जाना पड़ता था। धीरे-धीरे एक ऐसा समय आ गया एक दिन पहाड़ी पर एक छोटा गांव बस गया। महात्मा जी उस गांव में रहते थे और गांव के मसलों को सुलझाने में उनका सारा समय लग जाता था। महात्मा जी तपस्या को लगभग भूल ही चुके थे।
इस कहानी का निष्कर्ष हम नहीं निकालेंगे। आप कमेंट करके हमें बताएं कि यह कहानी क्या सन्देश दे रही है। हम आपके कमेंट का इंतज़ार करेंगे।

यह भी पढ़े :-

ज्ञान की बातें :अब किसी भी कठिन लक्ष्य को आसानी से पूरा करें |

ज्ञान की बातें :इसे पढ़ने के बाद आप कभी भी ब्रह्म मुहूर्त में नहीं सोएंगे |

 

11 thoughts on “गुफा की साधना | short story in hindi 2020”

  1. साधना में सब कुछ त्यागना पड़ता है जरूरत साधना को खत्म कर देती है

  2. Sadhna karne ke liye sansarik responsibility chhodna zaroori nahi, Jaise Ved Vyaas ji ne apne bete Shukdev ji ko Raja Janak ke pass bheja thha, yeh seekhne kaise ek Raja ho kar bhi Janak ji ek Mahan Tapaswi jaise rehte thhe

  3. बगैर सहारे के कैसे जिंदगी चलेगी, कुछ नहीं तो प्रभु का सहारा तो लेना ही पड़ेगा और गुरु का सहारा भी लेना पड़ेगा…

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *