चिंता की गठड़ी | worrires | chinta | kahani | short story in hindi |

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एक रात एक आदमी बहुत बेचैन था, उसे नींद नहीं आ रही थी, घबराहट में करवटें बदलता जा रहा था, फिर अचानक वह कमरे में टहलने लगा, कुछ देर चहल-कदमी कर फिर लेट गया, फिर उठा, टहलने लग। उसकी पत्नी झल्ला कर बोली, “सो क्यों नहीं जाते, मुझे भी सोने दो और खुद भी चैन से सो जाओ।

आदमी बोला, “अरे कैसे सो जाऊं भाग्यवान ! तुम्हें नहीं पता तीन महीने पहले मुझे कारोबार के लिए कुछ रुपयों की जरूरत थी, मैंने पड़ोसी से पैसे उधार मांगे थे और कहा था कि तीन महीने बाद वापस कर दूंगा। कल तीन महीने खत्म होने वाले हैं, कल पैसे वापस करने हैं लेकिन मेरे पास पैसों का कोई इंतजाम नहीं हुआ। कल पड़ोसी बहुत गुस्से होगा और मेरी इज्जत बर्बाद कर देगा।

पत्नी ने उसकी पूरी बात सुन तो ली पर वह कुछ कर तो सकती नहीं थी। वह बेचारी दिनभर का काम करके बहुत थकी हुई थी, आराम करना चाहती थी। लेकिन पति की चहलकदमी के कारण उसे नींद नहीं आ रही थी। एकाएक वह बिस्तर से उठी और गुस्से में घर की छत पर चली गई, साथ वाली छत पर उसका पड़ोसी और उसकी पत्नी सैर कर रहे थे। वह दोनों बहुत खुश भी थे, वह खुश इस लिए भी थे क्यूंकि उन्हें कल उधार दिया पैसा वापिस मिलने वाला था। पत्नी ने गुस्से से चिल्ला कर उन दोनों को कहा, ” सुनिए भाई साहिब, ऐसे बेफिक्र होकर मत घूमिए, मेरे पति ने कल जो आपको पैसे लौटाने हैं उनके पास लौटाने के लिए फूटी कौड़ी भी नहीं है, बस मैं आपको इतना ही बताने आई थी।

इतना कहकर वो पांव पटकती हुई नीचे आ गई और सारी बात पति को बता कर सोने के लिए लेट गई। लेटते ही उसको नींद आ गई, अब पति सोचने लगा कि जो कुछ होना था वह तो हो गया, अब तो कुछ नहीं हो सकता, सुबह जो होगा देखा जाएगा। मैं भी सो जाता हूं और यह सोचकर वह भी लेट गया, उसको भी नींद आ गई। उधार तो चुकता नहीं हुआ लेकिन कुछ समय के लिए चिंता खत्म हो गई, दोनों मियां-बीवी गहरी नींद सो गए।

लेकिन पड़ोसियों की छत पर चहलकदमी शुरू हो चुकी थी। चिंता की गठरी अब उनकी छत पर आ गिरी थी। वो दोनों सारी रात जागते रहे, उन्हें नींद नहीं आ रही थी।

कहानी पढ़कर आपको हंसी भी आई होगी लेकिन यह कहानी एक छोटा सा संदेश दे रही है, दिन में कितनी बार हम पता नहीं कितनी बातों पर चिंता करते रहते हैं-

  • यह ना हुआ तो क्या होगा?
  • अगर ऐसा हुआ तो क्या होगा?
  • मैंने अगर ऐसा कह दिया तो क्या होगा?

हमें कुछ कार्य प्रभु पर भी छोड़ देने चाहिए, जब हम अपनी चिंता की गठरी का भार प्रभु पर छोड़ते हैं तो प्रभु अपने आप कोई न कोई रास्ता बना देते हैं, लेकिन हमारी समस्या यह है कि हम अपना रास्ता खुद बनाना चाहते हैं, हम प्रभु के ऊपर अपनी चिंताओं को नहीं छोड़ना चाहते, क्योंकि हम प्रभु को जपते तो हैं लेकिन उसके होने का एहसास हमारे भीतर कभी पैदा नहीं होता। आएं अपनी चिंताओं को भगवान के ऊपर छोड़ दें। वह अनेक रास्ते निकाल देंगे।


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